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सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू को जीवन बचाने का अनिवार्य मिशन बताते हुए दिए दिशा निर्देश

दीपक कुमार पटेल अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद 26 April 2026

सुप्रीम कोर्ट ने कहा आईसीयू में उपचार सिर्फ प्रक्रिया नहीं कार्य योजना व्यावहारिक हो, तीन सप्ताह में सौंपने होगी रिपोर्ट। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभागों के प्रमुख एक हफ्ते में करें विशेषज्ञों संग बैठक। पहले पांच बुनियादी प्राथमिकताओं की पहचान की जाएगी जो मैनपॉवर और उपकरण से जुड़ी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा केवल एक सुविधा नहीं बल्कि नागरिकों का अधिकार है जिसे एक सूत्र ढांचे की आवश्यकता है पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल में आवश्यक बदलाव किए जाएं ताकि स्वास्थ्य कर्मी आईसीयू की जटिल स्थितियों को संभाल सकें।

स्वास्थ्य सेवाओं को जीवन की अंतिम उम्मीद माना जाता है और जब बात इंटेंसिव केयर यूनिट आईसीयू की हो तो वहां की एक एक सेकंड का महत्व बढ़ जाती है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में क्रिटिकल केयर सेवाओं में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आईसीयू के लिए निर्धारित न्यूनतम मानक दिशा निर्देशों को लागू करने को एक यथार्थवादी और व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि आईसीयू में उपचार केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि जीवन बचाने का अनिवार्य मिशन है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों के प्रमुख एक सप्ताह के भीतर विशेषज्ञों के साथ बैठक कर एक कार्य योजना बनाएं। कोर्ट का यह रुख उन मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद है जिन्हें गंभीर चिकित्सा की आवश्यकता होती है। इस योजना में सबसे पहले पांच बुनियादी प्राथमिकताओं की पहचान की जाएगी जो मैनपॉवर और उपकरण दोनों से जुड़ी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इन दिशा निर्देशों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन और उसकी निरंतर निगरानी के लिए एक ठोस तंत्र विकसित करने पर भी जोड़ दिया है। इस पूरी कवायत को 3 सप्ताह के भीतर पूरा कर अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है। कोर्ट ने जीपीएस आधारित व्यवस्था को जरूरी करते हुए कोर्ट ने एम्स टाटा मेमोरियल और मेदांता जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों के सुझाव को अत्यंत व्यावहारिक बताते हुए स्वीकार किया है। कोर्ट ने विशेष रूप से जीपीएस आधारित अस्पताल लोकेटर की आवश्यकता जताई है यह एक ऐसी व्यवस्था होगी जिससे संकट के समय कोई भी नागरिक यह जान सकेगा कि उसके निकटतम अस्पताल में क्या सुविधा उपलब्ध है। तकनीक न केवल समय बचाएगी बचाएगी बल्कि अनमोल जीवन बचाने में निर्णायक सिद्ध होगी। सुनवाई का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पहलू नर्सिंग स्टाफ को लेकर सामने आया। कोर्ट ने इस सुझाव का पुरजोर समर्थन किया कि चूंकि डॉक्टर समय-समय पर ही मरीज को देख पाते हैं जबकि नर्स 24 घंटे उनके साथ रहती है इसलिए उन्हें आईसीयू प्रबंधन में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल और पैरामेडिकल काउंसिल को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है। उनसे कहा गया है कि वह अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल में बदलाव करें ताकि भविष्य में निकलने वाले स्वास्थ्य कर्मी आईसीयू की जटिल स्थितियों को संभालने में पूरी तरह सक्षम हो। स्वास्थ्य मंत्रालय को दिशा निर्देश दिया कि वे इन दिशा निर्देशों को एक एडवाइजरी के रूप में सभी राज्यों के साथ साझा करें और अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करें। मामले की अगली सुनवाई 18 में को निर्धारित की गई है। यूपी में आईसीयू के लिए मानक लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के आईसीयू प्रभारी प्रोफेसर पीके दास के अनुसार इस संचालन के लिए निम्न मानक हैं। 1. 15 बेड की यूनिट में हर समय कम से कम एक विशेषज्ञ डॉक्टर आवश्य हो 2. 24 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य 3. एक बेड पर एक नर्सिंग स्टाफ हो 4. एक बेड के लिए निर्धारित जगह 150 से 200 स्क्वायर फीट होनी चाहिए 5. प्रत्येक बेड पर अनिवार्य रूप से मल्टी पैरामीटर मॉनिटर होना चाहिए 6. वेंटीलेटर के अलावा वाईपैप मशीन भी अनिवार्य रूप से होनी चाहिए 7. यूनिट में डिफीब्रिलेटर, इन्फ्यूजन पंप, सक्शन मशीन और आपातकालीन दवाएं 8. आईसीयू में ही डायलिसिस की भी सुविधा हो 9. आईसीयू को आपातकालीन और ऑपरेशन थिएटर के पास होना चाहिए 10. संक्रमण रोकने के लिए वेंटिलेशन और हेपा फिल्टर की व्यवस्था 11. संक्रमण नियंत्रण के लिए कड़ी निगरानी जैसे हाथ की स्वच्छता और कैथेटर देखभाल 12. मरीज के भारती और डिस्चार्ज के लिए स्पष्ट नीतियां 13. 24/7 डायग्नोसिस सेवाएं जैसे लैब इमेजिंग और एक-रे

Disclaimer: This news item is for informational purposes only and does not constitute legal advice. For specific legal guidance, please consult with an advocate at Patel Law Chambers.